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रविवार, 22 मई 2011

हिन्दुओ के धार्मिक ग्रन्थ भागवत में आपराधिक अश्लीलता.......


हिन्दुओ के धार्मिक ग्रन्थ भागवत में आपराधिक अश्लीलता.......




भागवत हिन्दुओ का पवित्र धरम ग्रन्थ है लेकिन भागवत में जिस अश्लीलता का नंगा नाच हमें देखने को मिलता है वह किसी अन्य धरम ग्रन्थ में देखने को नहीं मिलता ! यह एक ऐसा ग्रन्थ है जिससे समाज में अश्लीलता को बड़ावा मिल रहा है और समाज गलत दिखा में जा रहा है भागवत के कुछ प्रसंग देखिये --
           स्कंध १ अधाय १० मी विवाहित स्तारियो तक क्रिशन के साथ के अधरपान में भाव विभोर होकर अचेत हो जाने का वेर्नन है !
स्कंध ३ अद्धाय १५ में सनकादी कुमारो का जीकर आता है जो पूरी उम्र होकर भी नंगे धडंगे रहते है और वृद्ध , जवान ,और बालिकाओ के साथ लिंग खोले विचरण करते थे !
स्कंध १ अद्धाय १९ में शुकदेव का वर्णं आता है वह भी नंग धडंग रहते थे और स्तरीय जहा नहाती थी वाही पहुच जाते थे नंगी नहाने वाली स्त्रिया भी इनके सामने नंगी ही रहती थी!
ब्रह्मा ने अपनी पुत्री से ही संभाग किया था यह प्रसंग भागवत के स्कंध ३ अध्धय ३१ में आता है !
कश्यप की पत्नी दिति के बारे में आता है की वह कामातुर होकर सबके सामने ही कामुक हरकते करती थी और लोक लज्जा का कोई ध्यान नहीं रखती थी दिति की कथा स्कंध ३ अद्धाय १४ में आती है !
पांच पतियों वाली द्रोपती को सब जानते है लेकिन भागवत में एक ऐसी ओरत भी है जिसके दस पति थे यह मारिषा मान की ओरत दस पर्चेताओ की की पत्नी थी इसका वर्णंन स्कंध ४ अध्याय ३० में आया है !
स्कंध ५ अध्याय २४ में अतल लोक का वर्णन आया है जहा सत्रीया स्वंय पुरुष को हाटक रश पीला कर मदहोश करती है और जब वे धुत हो जाते है तो उनसे स्वंय चिपट जाती है और नंगा कर भोग में संगलन हो जाती है !
भागवत के स्कंध ८ अध्याय १२ में शंकर और मोहिनी का वर्णन का वर्णन आता है ! मोहिनी वस्त्र हिन् हो चुकी थी और शंकरजी उनकी और बढे तो वो शर्माने लगी और वह से चलने लगी शंकर उनके पीछे पड गए काम के वशीभूत होकर शंकर हथिनी के पीछे हाथी की तरह दोड़ने लगे और दोड कर पकड़ लिया ! तथा नंगी मोहिनी को अपने पास में भरकर आलिंगन करने लगे इससे मोहिने के बाल बिखर गए मोहिनी घयल होकर छूडा कर भागी तो शंकर फिर उनके पीछे भागने लगे ! काम के वेग से उनका भागते में ही वीर्य सख्लित हो गया ! वीर्य सख्लित ह०ओ जाने के बाद शंकर को होश आया !
भागवत में ही क्रिशन और गोपियों का जीकर आता है जिसमे भाग्वान्काहा जाने वाला क्रिशन नहाती हुई गोपियों के कपडे उठा कर पद पर चड जाता है और गोपियों से कहता है की तन खोले नंगी बाहर आ जाओ और अपने वस्त्र ले जाओ ! (स्कंध १०, अध्याय २२)!
क्रिशन की रासलीला का वर्णन भागवत में स्कंध १० में अध्याय २९ से ३३ तक पांच अध्यायो में किया गया है भागवतकार इतना रसिया है की क्रिशन रास लीला का अतिविश्तार से वर्णन करता है !गोपियों को विरह उद्धव का उपदेस सब इस रास लीला में आता है !
ब्रिज की नारिया  माँ , बाप , पति . बंधू ,सब छोड़ कर रात में क्रिशन के पास भाग कर चली आती है ! रासलीला में परे स्त्रियों के साथ नाचना , उनसे लिपटना और उनके साथ अश्लील हरकत करना कोई कर सकता है ? पर हिन्दुओ के भगवान ऐसा करते थे !
                                                                           भागवत समाज में अश्लीलता फैलता है ! जब भगवन कहा जाने वाले इतने बेशर्म और निर्लज्ज होगे तो साधारण आदमी तो अशलीलता के गर्त में क्यों न डूब जाएगा ?????????  
  by Sanjay Kumar 

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