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मंगलवार, 9 अगस्त 2011
गुरुवार, 9 जून 2011
दिल्ली में 31 बाल श्रमिक छुडाए गए नयी दिल्ली : पश्चिमी दिल्ली की एक जूता बनाने वाली एक इकाई पर छापा मारकर 31 बच्चों को आज छुड़ा लिया गया और इस दौरान दो फैक्टरियों को सील कर दिया गया. छुडाए गए ज्यादातर बच्चे 13 साल से कम आयु के थे. इन बच्चों को बचपन बचाओ आंदोलन बीबीए की शिकायत पर बाल अधिकारों पर दिल्ली कार्य बल ने नांगलोई थाना अंतर्गत अमर कालोनी और कमरुद्दीन नगर इलाके से छुडाया. छापेमारी के दौरान पांच नियोक्ताओं को गिरफ्तार किया गया और दो फैक्टरियां सील की गईं. छापेमारी की कार्रवाई का नेतृत्व पंजाबी बाग के एसडीएम प्रदीप कुमार ने किया. उनके साथ श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और बीबीए के सदस्य भी थे. ज्यादातर बच्चे उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और अलीगढ जिले तथा बिहार के छपरा और दरभंगा जिले के थे.
दिल्ली में 31 बाल श्रमिक छुडाए गए
नयी दिल्ली : पश्चिमी दिल्ली की एक जूता बनाने वाली एक इकाई पर छापा मारकर 31 बच्चों को आज छुड़ा लिया गया और इस दौरान दो फैक्टरियों को सील कर दिया गया.
छुडाए गए ज्यादातर बच्चे 13 साल से कम आयु के थे. इन बच्चों को बचपन बचाओ आंदोलन बीबीए की शिकायत पर बाल अधिकारों पर दिल्ली कार्य बल ने नांगलोई थाना अंतर्गत अमर कालोनी और कमरुद्दीन नगर इलाके से छुडाया.
छापेमारी के दौरान पांच नियोक्ताओं को गिरफ्तार किया गया और दो फैक्टरियां सील की गईं. छापेमारी की कार्रवाई का नेतृत्व पंजाबी बाग के एसडीएम प्रदीप कुमार ने किया. उनके साथ श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और बीबीए के सदस्य भी थे. ज्यादातर बच्चे उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और अलीगढ जिले तथा बिहार के छपरा और दरभंगा जिले के थे.
मंगलवार, 7 जून 2011
बाल कैदियों ने एनिमेशन के जरिए देखा मंजूषा कला बाल कैदियों ने एनिमेशन के जरिए देखा मंजूषा कला को Jun 07, 11:14 pm बताएं भागलपुर, विश्वविद्यालय संवाददाता: आइआइटी मुम्बई, आइडीसी और एनआइडी अहमदाबाद की टीम मंगलवार को बाल सुधार केंद्र में भागलपुर पहुंची। टीम ने बाल सुधार गृह में एनीमेशन के जरिए अंग क्षेत्र की लोक कला मंजूषा को बच्चों को दिखाया। बाल कैदियों ने एनिमेशन की बारिकियों को लाइट बाक्स के माध्यम से जाना। आइआइटी मुम्बई के सिद्धांत कुमार एवं एनआइडी अहमदाबाद की रजनी बाला राजोरियो ने बाल कैदियों के सामने अंग जनपद की लोक कला को एनिमेशन के जरिए अभव्यक्ति प्रदान की। यह जानकारी और एक प्रयास संस्था के सचिव मीना देवी ने विज्ञप्ति जारी कर दी।
बाल कैदियों ने एनिमेशन के जरिए देखा मंजूषा कला
बाल कैदियों ने एनिमेशन के जरिए देखा मंजूषा कला को
Jun 07, 11:14 pm
भागलपुर, विश्वविद्यालय संवाददाता: आइआइटी मुम्बई, आइडीसी और एनआइडी अहमदाबाद की टीम मंगलवार को बाल सुधार केंद्र में भागलपुर पहुंची। टीम ने बाल सुधार गृह में एनीमेशन के जरिए अंग क्षेत्र की लोक कला मंजूषा को बच्चों को दिखाया। बाल कैदियों ने एनिमेशन की बारिकियों को लाइट बाक्स के माध्यम से जाना। आइआइटी मुम्बई के सिद्धांत कुमार एवं एनआइडी अहमदाबाद की रजनी बाला राजोरियो ने बाल कैदियों के सामने अंग जनपद की लोक कला को एनिमेशन के जरिए अभव्यक्ति प्रदान की। यह जानकारी और एक प्रयास संस्था के सचिव मीना देवी ने विज्ञप्ति जारी कर दी।
रविवार, 22 मई 2011
हिन्दुओ के धार्मिक ग्रन्थ भागवत में आपराधिक अश्लीलता.......
हिन्दुओ के धार्मिक ग्रन्थ भागवत में आपराधिक अश्लीलता.......
भागवत हिन्दुओ का पवित्र धरम ग्रन्थ है लेकिन भागवत में जिस अश्लीलता का नंगा नाच हमें देखने को मिलता है वह किसी अन्य धरम ग्रन्थ में देखने को नहीं मिलता ! यह एक ऐसा ग्रन्थ है जिससे समाज में अश्लीलता को बड़ावा मिल रहा है और समाज गलत दिखा में जा रहा है भागवत के कुछ प्रसंग देखिये --
स्कंध १ अधाय १० मी विवाहित स्तारियो तक क्रिशन के साथ के अधरपान में भाव विभोर होकर अचेत हो जाने का वेर्नन है !
स्कंध ३ अद्धाय १५ में सनकादी कुमारो का जीकर आता है जो पूरी उम्र होकर भी नंगे धडंगे रहते है और वृद्ध , जवान ,और बालिकाओ के साथ लिंग खोले विचरण करते थे !
स्कंध १ अद्धाय १९ में शुकदेव का वर्णं आता है वह भी नंग धडंग रहते थे और स्तरीय जहा नहाती थी वाही पहुच जाते थे नंगी नहाने वाली स्त्रिया भी इनके सामने नंगी ही रहती थी!
ब्रह्मा ने अपनी पुत्री से ही संभाग किया था यह प्रसंग भागवत के स्कंध ३ अध्धय ३१ में आता है !
कश्यप की पत्नी दिति के बारे में आता है की वह कामातुर होकर सबके सामने ही कामुक हरकते करती थी और लोक लज्जा का कोई ध्यान नहीं रखती थी दिति की कथा स्कंध ३ अद्धाय १४ में आती है !
पांच पतियों वाली द्रोपती को सब जानते है लेकिन भागवत में एक ऐसी ओरत भी है जिसके दस पति थे यह मारिषा मान की ओरत दस पर्चेताओ की की पत्नी थी इसका वर्णंन स्कंध ४ अध्याय ३० में आया है !
स्कंध ५ अध्याय २४ में अतल लोक का वर्णन आया है जहा सत्रीया स्वंय पुरुष को हाटक रश पीला कर मदहोश करती है और जब वे धुत हो जाते है तो उनसे स्वंय चिपट जाती है और नंगा कर भोग में संगलन हो जाती है !
भागवत के स्कंध ८ अध्याय १२ में शंकर और मोहिनी का वर्णन का वर्णन आता है ! मोहिनी वस्त्र हिन् हो चुकी थी और शंकरजी उनकी और बढे तो वो शर्माने लगी और वह से चलने लगी शंकर उनके पीछे पड गए काम के वशीभूत होकर शंकर हथिनी के पीछे हाथी की तरह दोड़ने लगे और दोड कर पकड़ लिया ! तथा नंगी मोहिनी को अपने पास में भरकर आलिंगन करने लगे इससे मोहिने के बाल बिखर गए मोहिनी घयल होकर छूडा कर भागी तो शंकर फिर उनके पीछे भागने लगे ! काम के वेग से उनका भागते में ही वीर्य सख्लित हो गया ! वीर्य सख्लित ह०ओ जाने के बाद शंकर को होश आया !
भागवत में ही क्रिशन और गोपियों का जीकर आता है जिसमे भाग्वान्काहा जाने वाला क्रिशन नहाती हुई गोपियों के कपडे उठा कर पद पर चड जाता है और गोपियों से कहता है की तन खोले नंगी बाहर आ जाओ और अपने वस्त्र ले जाओ ! (स्कंध १०, अध्याय २२)!
क्रिशन की रासलीला का वर्णन भागवत में स्कंध १० में अध्याय २९ से ३३ तक पांच अध्यायो में किया गया है भागवतकार इतना रसिया है की क्रिशन रास लीला का अतिविश्तार से वर्णन करता है !गोपियों को विरह उद्धव का उपदेस सब इस रास लीला में आता है !
ब्रिज की नारिया माँ , बाप , पति . बंधू ,सब छोड़ कर रात में क्रिशन के पास भाग कर चली आती है ! रासलीला में परे स्त्रियों के साथ नाचना , उनसे लिपटना और उनके साथ अश्लील हरकत करना कोई कर सकता है ? पर हिन्दुओ के भगवान ऐसा करते थे !
भागवत समाज में अश्लीलता फैलता है ! जब भगवन कहा जाने वाले इतने बेशर्म और निर्लज्ज होगे तो साधारण आदमी तो अशलीलता के गर्त में क्यों न डूब जाएगा ?????????
by Sanjay Kumar
वह मारा जाएगा
वह मारा जाएगा
♦ अश्विनी कुमार पंकज
देहरी लांघो
लेकिन धर्म नहीं
क्योंकि यही सत्य है
लेकिन धर्म नहीं
क्योंकि यही सत्य है
पढ़ो
खूब पढ़ो
लेकिन विवेक को मत जागृत होने दो
क्योंकि यही विष (शिव) है
खूब पढ़ो
लेकिन विवेक को मत जागृत होने दो
क्योंकि यही विष (शिव) है
हंसो
जितना जी चाहे
जिसके साथ जी चाहे
पर उसकी आवाज से
देवालयों की मूर्तियों को खलल न पड़े
क्योंकि यही सुंदर है
जितना जी चाहे
जिसके साथ जी चाहे
पर उसकी आवाज से
देवालयों की मूर्तियों को खलल न पड़े
क्योंकि यही सुंदर है
याद रखो
देहरी ही सत्य है
अज्ञान ही शिव है
धर्म ही सुंदर है
देहरी ही सत्य है
अज्ञान ही शिव है
धर्म ही सुंदर है
सत्यं शिवं सुंदरम का अर्थ
प्रेम नहीं है
जो भी इस महान अर्थ को
बदलना चाहेगा
वह मारा जायेगा
चाहे वह मेरा ही अपना लहू क्यों न हो
प्रेम नहीं है
जो भी इस महान अर्थ को
बदलना चाहेगा
वह मारा जायेगा
चाहे वह मेरा ही अपना लहू क्यों न हो
हिन्दुओ के भगवान हमेसा ब्राह्मण या सवर्ण ही क्यों ?? कोई दलित क्यों नहीं ??
हिन्दुओ के भगवान हमेसा ब्राह्मण या सवर्ण ही क्यों ?? कोई दलित क्यों नहीं ??
ऐसा नहीं है कि हमारा देश भुखमरों का देश है इसलिए भुखमरी है, गरीबों का देश है इसलिए गरीबी है और लाचारी व बेरोजगारों का देश है इसलिए लाचारी व बेरोजगारी है। इसके विपरीत तथ्य यह है कि हमारे देश में 15 प्रतिशत लोगों के पास इतना धन , इतना सोना, और इतना बैंक जमा है कि विश्व के पचासों देशों की पूरी जनसंख्या के पास होगा। हमारा देश कर्ज में डूबा है परंतु हमारे देश के इन 15 प्रतिशत (सवर्णों) के विदेशी खाते में जमा धन के ब्याज से ही भारत का पूरा कर्जा एक साल में उतर सकता है।
हमारे देश में 10 लाख मंदिर हैं जो अरबों-खरबों के सोने चांदी और अनेक आभूषणों से भरे पड़े हैं। यदि विश्व में सोने के तख्त पर कोई व्यक्ति बैठता है तो वह एक व्यक्ति भारत का गुरू शंकराचार्य ही है। कुछ समय पूर्व अभी एक शंकराचार्य की मृत्यु हुई थी तो उसका शव भी सोने के तख्त पर लिटाया गया था। भारत में 5 प्रतिशत उच्च जातीय जमींदार हैं जिनमें एक-एक के पास 10-10 हजार एकड़ भूमि के फ़ार्म हैं। इन जमींदारों के पास भी अरबों-खरबों की सम्पत्ति है। इनमें कुछ राज-घराने के लोग हैं जिनके पास अब भी अरबों-खरबों के खजाने हैं, स्वर्ण महल हैं और निजी हवाई जहाज हैं। ये जमींदार और सामन्त अपनी बेटी और बेटे के विवाहों में रत्न जड़ित गलीचों का बिछोना बिछाते हैं।
भारत का वैश्य वर्ग भी कम नहीं है। वह सुई से लेकर रेल, हवाई जहाज तक का उद्योग चलाता है। सोना-चांदी, हीरे जवाहरात , तस्करी का माल, गाय की चर्बी और जीवित इन्सानी बच्चों तथा स्त्रियों के साथ ही वह आदमी के खून तक की तिजारत करता है। खाद्य-पदार्थों, दवाओं और जहर तक में मिलावट कर धन बटोरता है। आज देश की एक तिहाई पूंजी उसके पास है।
सच यह है कि हमारा 85 प्रतिशत भारत गरीब है, भूखा है, नंगा है, बेघरबार है और लाचार है पर 15 प्रतिशत सवर्ण लोग धन की उबकाई करते हैं और इनके कुत्ते कारों में सफर करते हैं, पांच सितारा होटलों में पुडिंग और मलाई खाते हैं जिसकी उन्हें बदहजमी हो जाती है। भारत के भूगोल में जहां एक तरफ शहरी कूड़े-करकट के ढेरों के बीच सड़े गले प्लास्टिक और फूंस से ढकी मिट्टी या बांस के खम्बों की खड़ी दलितों की झोंपड़ियां हैं तो दूसरी ओर वहीं हिन्दुओं की बहुमंजिली इमारतें, ऊंचे-ऊंचे रंगमहल और शीशमहल बने हुए हैं। एक तरफ पेट भरने के लिए मेहनत मजदूरी भी पर्याप्त नहीं है तो दूसरी ओर हिन्दुओं के ऊंचे-ऊंचे औद्योगिक प्रतिष्ठान हैं, दुकानें, कारखाने हैं और भूमि के हजारों-हजारों एकड़ फार्म हैं। एक तरफ जहां दलितों का अपना कोई प्राइमरी स्कूल तक नहीं है वहीं दूसरी ओर हिन्दुओं के अपने डिग्री कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। एक तरफ दलित गरीब के पास चलाने को टूटी साइकिल भी नहीं है तो दूसरी ओर एक-एक हिन्दू, सेठ, साहब और सन्यासी के पास 50-50 काफिलों में चलने वाली विलायती कारें हैं। दलित दरिद्र के मनोंरंजन का साधन मात्र उसकी पत्नी और उसके बच्चे हैं, जबकि हिन्दू महन्त, मठाधीश, ज़मींदार, शरमाएदार और सेठ चोटी से पैर तक अय्यासी में डूबे हुए रहते हैं। एक तरफ दलित मासूम बच्चों को 40-40 रूपये में पेट की खातिर बाजार में बेच देते हैं वहीं इन हिन्दुओं के अपने मसाजघर, मनोरंजन थियेटर, नाचघर, जुआघर और मयखाने हैं जहां जीवित मांस का व्यापार होता है।
हमारा देश गरीब है यह चीख-पुकार एक नाटक है, लाचारी है, हमारे देश में बेरोजगारी है यह भी एक नाटक है। गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी किसी देश में तब कही जा सकती है जब गरीबी, बेरोजगारी , लाचारी और भुखमरी से सब प्रभावित हों। हमारे देश में ऐसा नहीं है। हमारे यहां करोड़ों गरीब हैं और करोड़ों नंगे भी हैं। सच यह है कि हमारे यहां 15 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो सोना खाते हैं और सोने का ही वमन करते हैं। यहां मूल समस्या समाज में हिस्सेदारी की है। यदि 15 प्रतिशत के पास जमा सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात के धन में हिस्सेदारी कर दी जाये तो भारत में एक भी व्यक्ति न भूखा सो सकता है न एक भी व्यक्ति नंगा रह सकता है। तब एक भी व्यक्ति न बेघरबार रह सकता है और न तब एक भी व्यक्ति बेरोजगार रह सकता है। यदि धर्मालयों का धन बाहर निकाल दिया जाय, भूमि का भूमिहीनों में वितरण कर दिया जाय और उद्योगों के लाइसेंस में एक व्यक्ति एक उद्योग कर दिया जाए तो हर तबाही तुरन्त दूर हो सकती है अथवा देवालयों, भूमि और उद्योग-व्यापार का राष्ट्रीयकरण कर दिया जाय तो हमारा देश 132 वें स्थान से उठकर आज ही 32 वें स्थान पर आ सकता है।
देश की इस गर्दिश के लिए कौन उत्तरदायी है यह एक खुली किताब है। यह इन मुठ्ठी भर उच्च हिन्दुओं की स्वार्थ, शोषण दमन और भेदभावपूर्ण नीति का परिणाम है।
-पृ. 1-3, हिन्दू विदेशी हैं, लेखक एस.एल.सागर, सागर प्रकाशन 223 दरीबा,मैनपुरी, उ.प्र., द्वितीय संस्करण 1999 से साभार Posted by सत्य गौतम
शुक्रवार, 20 मई 2011
दोस्तों किसी साइबर अपराधी ने मेरे फेसबुक का पासवर्ड फिर से हैक कर लिया है..आपलोगों से अनुरोध है की किसी तरह की टिपण्णी पर अगली सूचना तक बिश्वास ना करें.मैंने अपनी तरफ से एक्शन ले लिया है. एक ऍफ़ आई आर दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में कर दिया है . जिसकी एक कॉपी यहाँ पेस्ट कर रहा हूँ...क्षमाप्रार्थी ...ओम सुधा ९५४०६०४१२५
दोस्तों किसी साइबर अपराधी ने मेरे फेसबुक का पासवर्ड फिर से हैक कर लिया है..आपलोगों से अनुरोध है की किसी तरह की टिपण्णी पर अगली सूचना तक बिश्वास ना करें.मैंने अपनी तरफ से एक्शन ले लिया है. एक ऍफ़ आई आर दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में कर दिया है . जिसकी एक कॉपी यहाँ पेस्ट कर रहा हूँ...क्षमाप्रार्थी ...ओम सुधा 9540604125
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